Sunday, June 28, 2009
दिवस
अभी कुछ दिनों पहले फादर्स डे और मदर्स डे गुज़रा है. और शुक्र है की गुज़र गया. मेरे कुछ दोस्तों ने तो परेशान कर दिया था भाई. "अरे अभिजीत भाई आज तो फादर्स डे है घर पे फोन किया की नहीं, कुछ गिफ्ट भेजा की नहीं". कमाल है भाई.... मुझे तो ये कोई भी दिवस मनाने का फंडा ही समझ मे नही आता है. मैं ये नही कहता कि ये सारे दिवस बेमानी हैं. लेकिन लोग इसे जिस तरह से मनाते हैं वो मुझे कुछ हज़म नहीं होता है. सबसे बड़ा उदाहरण तो अपने राष्ट्रीय पर्वों का ही है. अगर मोटे तौर पर बात की जाए तो हम अपने राष्ट्रीय त्योहारों पर क्या करते हैं... सुबह उठे , नहा-धो कर अपने कार्यालय या विद्यालय गये , झंडे को सलामी दी , राष्ट्र गान गाया , मिठाई खाई और वापस अपनी दिनचर्या(मेरा मतलब है छुट्टी वाली दिनचर्या से है) पे लौट गये. आख़िर इसी बहाने एक छुट्टी तो मिली है ना तो उसका तो भरपूर फ़ायदा तो उठना ही पड़ेगा. बहुत इमोशनल हुए तो तीन चार देशभक्ति गीत सुन लिए और सीना चौड़ा किए हुए निकल गये सिनेमा हॉल. अगर दुर्भाग्य से किसी तथाकथित बुद्धिजीवियों की टोली में फँस गये तो एक मस्त सा लेक्चर दे दिया. ये बात अलग है की लेक्चर में कही गयीं बातें लेक्चर तक ही सीमित होती हैं. उसका रोज़मर्रा की ज़िंदगी मे असर सिफ़र ही रहा है. मुझे लगता है की ये फादर्स डे और मदर्स डे का जो चलन है वो किसी ऐसे व्यक्ति ने निकाला होगा जो साल मे एक बार कम से कम अपने माता-पिता को ज़रूर मिस करता होगा. कम से कम इस बहाने उसके माता पिता तो उसे याद आते ही होंगे और इस दिन वो पूरे साल की कसर निकाल लेता होगा. वैसे ही जैसे लोग कहते हैं की चाहे जितना भी पाप किया हो एक बार गंगा जी मे डुबकी लगाली तो सारे पाप धुल जाएँगे. वैसे एक तरह से ये अच्छा भी है. ना से हाँ तो फिर भी ठीक ही होता है. लेकिन मैं अपने आप को एक दिवस में बाँधने मे विश्वास नहीं रखता हूँ. मेरी इस पोस्ट का मतलब ये नहीं है की मैं किसी भी तरह के समारोह या उत्सव का विरोध कर रहा हूँ, बल्कि मेरा उद्देश्य ये है की हम कुछ भी करें किसी भी तरीके से किसी दिवस को मनाएँ, लेकिन अगर हम उसके मर्म को समझ नहीं पाएँगे तो इस तरह के आडंबर का कोई मतलब नही है. और मेरे ख्याल से इसे किसी ख़ास दिन नहीं बल्कि हमेशा अपने साथ रखना होगा. हाँ हम उस ख़ास दिन ये आकलन कर सकते हैं कि हम जिस भावना से इस दिवस को मना रहे हैं वो हमारे साथ रहा है या ये सिर्फ़ किस एक दिन का उद्गार है......
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