Monday, November 9, 2009

लापतागंज - शरद जोशी की कहानियों का पता

एक दिन ऐसे ही चॅनेल सर्फ कर रहा था तो एक धारावाहिक से मुलाकात हुई. नाम था "लापतागंज - शरद जोशी की कहानियों का पता"(SAB TV). शरद जोशी हिन्दी के अच्छे व्यंग्यकार के रूप मे जाने जाते हैं. ये धारावाहिक उन्हीं की कहानियों से प्रेरित है. उनकी कहानियाँ समाज के कड़वे सत्य को एक सटीक व्यंग्य के रूप में प्रदर्शित करती है. उनकी कहानियाँ एक तरफ तो आपको अपने चुटीले संवादों से गुदगुदाती हैं, वहीं दूसरी तरफ आपको रोज़मर्रा की परेशानियों पर भी सोचने को मज़बूर करती हैं.

लापतागंज भारत के एक छोटे से क़स्बे की कहानी है जिसे बहुत पहले कहीं खो दिया गया है. यहाँ के लोग अपने रोज़ की बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करते रहते हैं लेकिन फिर भी यहाँ रहने वाले लोग खुश रहने की कला जानते हैं. ये धारावाहिक यहाँ के लोगों के द्वारा विपरीत परिस्थितियों मे भी खुश रहने के जज़्बे को दर्शाता है. और यही इसकी ख़ासियत है.

आइए मैं यहाँ के कुछ बाशिंदों से आपको मिलवाता हूँ. मुख्य किरदार मे हैं बिज़्ज़ी पांडे. जैसा की नाम से ही प्रतीत होता है की जनाब ज़रा व्यस्त रहते हैं. भाई आख़िर 'ला'(law) जो कर रहे हैं. "पापा की कसम हम बता रहे हैं (इनका तकिया कलाम) ये बड़े ही दिलचस्प आदमी हैं". इनकी एक प्रेमिका भी है, नाम है सुरीली. लेकिन अफ़सोस बेचारी बोल नही सकती है. लेकिन बिज़्ज़ी पांडे को उनकी 'आयो मायो' में जो आनंद आता है वो तो उन्हें लता जी के गानों में भी नहीं आता. लेकिन बेचारे सुरीली की माता जी से परेशान रहते हैं. अब क्या है की वो इन्हें सुरीली के पास फटकने जो नहीं देती हैं. खैर बिज़्ज़ी पांडे अपने इन कारनामों में ही व्यस्त हैं. देखिए क्या होता है.....

एक और परिवार है यहाँ मुकुन्दी लाल गुप्ता जी का. बड़े भले आदमी हैं बेचारे. बस थोड़ा सा अपनी पत्नी की बकबक से परेशान रहते हैं. इनके सुपुत्र का नाम है चुकुन्दी लाल. अपनी माँ की तरह ये भी सवाल बहुत करता है. लेकिन मिला जुला के बहुत ही प्यारा परिवार है इनका.

हाँ एक अहम किरदार और है कछुआ चाचा का. ये एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति है जिनकी शादी नही हुई है. "किसी किसी की नहीं भी होती है". अब आप बोलेंगे की मुकुन्दी बाबू की शादी तो हो गयी है. "किसी किसी की हो भी जाती है". दरअसल ये इनका तकिया कलाम है. अंदर की बात है की इन्हे भी किसी से इश्क़ हुआ था अपने ज़माने में लेकिन बेचारे की भेजी हुई चिट्ठी(प्रेम पत्र) अभी तक रास्ते मे ही है, और ये इंतेज़ार में ही हैं.

कभी मौका मिले तो एक बार देखने की कोशिश कीजिएगा, "पापा की कसम हम बता रहे हैं बहुत मज़ा आएगा."

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