Saturday, January 2, 2010

३ ईडियट्स 'आल इज़ वेल?'

नये साल की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ इस साल का पहला ब्लॉग आपके सामने रख रहा हूँ. साल के शुरुआत मे ही एक अजीब सी परिस्थिति से पाला पड़ा. ३ ईडियट्स / ५ पॉइंट सम्वन. जहाँ तक मेरी सोच जाती है ये मुद्दा ना तो इसका है कि कौन इस कहानी का मूल कहानीकार है और ना ही इसका कि किसे इसका श्रेय मिलना चाहिए. सवाल है एक परिपक्व सोच की. मैं थोड़ा असमंजस में हूँ कि इस मुद्दे से संबंधित लोग, जिन्हे मैं बहुत ही उम्दा कलाकार की श्रेणी में रखता हूँ , ऐसी परिस्थिति को कैसे उत्पन्न होने दे सकते हैं. मेरा एक बहुत ही साधारण सवाल है की अगर उस फिल्म की शुरुआत में ये दिखाया जाए कि "चेतन भगत की ५ पॉइंट सम्वन से प्रेरित" , तो क्या इस फिल्म से जुड़े लोगों की काबिलियत पे सवाल उठ जाते? वैसे भी सभी लोगों को ये पता था की ये फिल्म उसी किताब पे आधारित है. तो इसके निर्माता किसे धोखा देना चाहते हैं? खैर, अब ये तो उनकी सोच पे निर्भर करता है.....

दूसरा प्रश्न है की क्या ये फिल्म बिना ' ५ पॉइंट सम्वन ' के संभव हो पाती? नहीं. तो फिर कोई भी क्रियेटिव व्यक्ति ये कैसे कह सकता है कि ये एक "ओरिजिनल" कहानी है. आपको नही लगता कि ये उनकी क्रेडिबिलिटी पे एक सवाल उठाता है? अभी कुछ दिन पहले ही एक फिल्म आई थी, 'स्लम्डॉग मिलियनेर'. वो फिल्म भी एक उपन्यास पर आधारित थी, विकास स्वरूप की 'Q & A'. मैने वो उपन्यास भी पढ़ी है और फिल्म भी देखी है. दोनों में सिर्फ़ एक समानता है की दोनों का ढाँचा एक है बाकी सारी चीज़ अलग है. साइमन बेअफ़ौय जिन्होने उस फिल्म की स्क्रीनप्ले तैयार की थी उन्होने कहा था कि 'Q & A' के बिना ये फिल्म और ना ही ये ऑस्कर संभव हो पाता. और ३ ईडियट्स वाले फिल्म की घटनाओं की लिस्ट तैयार कर रहे हैं कि क्या क्या इसमे उपन्यास से अलग है. या तो इन्हें 'अडाप्टेशन' का मतलब ही नही पता है या ये इसे समझना ही नहीं चाहते हैं. यहाँ ये भी कहना होगा की उन्होने इस किताब को फिल्म मे ढालने के लिए बहुत ही उम्दा काम और बदलाव किए हैं. और इसी काबिलियत के तो हम कायल हैं राजकुमार हिरानी और अभिजात जोशी के. लेकिन मुझे अफ़सोस है कि ऐसा करने से भी ये कहानी उनकी नही हो जाती है.....

सबसे खटकने वाली बात ये की शुरुआत में इस मुद्दे से संबंधित सारे सवालों का जवाब आमिर ख़ान दे रहे थे, जिन्होने ये किताब पढ़ी ही नही है. भाई साहब आप इतने बड़े कलाकार हैं , आपके काम को लोग इतना सराहते हैं, इसका मतलब ये तो नही की आप जो बोलेंगे वो सही ही होगी, और वो भी तब जबकि आपको सिर्फ़ एक पक्ष की बात पता है. आप जैसे 'PERFECTIONIST' से ऐसी आशा नहीं थी. और ये हमें एक और वजह देता है शक कि क्यूँ आमिर को सामने लाया गया जबकि वो सही व्यक्ति नही थे इस मुद्दे पे कुछ कहने के लिए. क्या इसके निर्माता उनके पॉपुलर होने को भुनाना चाहते थे?

आशा करता हूँ कि लोगों को बात समझ मे आएगी और अंत मे 'आल इज़ वेल' का प्रश्नचिन्ह मिट जाएगा..........

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