Saturday, May 23, 2009

चुनाव

अभी कुछ दिन पहले ही विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का आम चुनाव समाप्त हुआ. बहुत मायने मे ये चुनाव एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है. पिछले लगभग 15 सालों से हम अपने देश में गठबंधन की सरकार देखते आ रहे हैं. इस बार भी गठबंधन की सरकार ही रहेगी, लेकिन इस बार इसकी संरचना थोड़ी अलग होने वाली है. अलग इस मामले में की इस बार मुख्य दल एक टॅशन मे रहेगी. इसका प्रमाण हम देख भी रहे हैं. और मेरे ख़याल से ये अच्छा भी है. खैर मैं ये काम उन पे ही छोड़ देता हूं. इस बार के चुनाव परिणाम को देखकर बहुत ही सुखद आश्चर्य का अनुभव होता है. ख़ासकर बिहार के परिणाम को देखकर. मन बहुत प्रसन्न हुआ. ऐसा इसलिए नहीं की मैं किसी दल विशेष को पसंद करता हूं. बल्कि मेरी प्रसन्नता की वजह है बिहार के लोगों के सोच में परिवर्तन. हमारे यहाँ एक कहावत है (थी )की " वोट और बेटी दूसरे जात मे नही दी जाती है". और दुर्भाग्य से अभी तक इसका अक्षरशः पालन होता आया है. लेकिन इस बार का चुनाव परिणाम इस मिथक को तोड़ता हुआ प्रतीत होता है. जो की काफ़ी सुखद है.इस बार लोगों ने विकास को मुद्दा बनाया है. लगता है की लोग अब जाग गये हैं और उन्होने भी जात-पात से उपर उठकर सोचना शुरू कर दिया है. और ये लहर सिर्फ़ कुछ क्षेत्रों मे ही सीमित नही है बल्कि ये पूरे प्रदेश में विस्तृत है. आशा करता हूँ कि ये समझ लोगों मे अब हमेशा रहेगी और लोग हमेशा ही समाज की बेहतरी को सोच समझ कर ही अपना कीमती मत प्रयोग मे लाएँगे. मैने जब इस बार के नामांकन पे ध्यान दिया तो मुझे दो बात अच्छी नही लगीं. एक तो ये की एक उम्मीदवार एक से ज़्यादा जगह से अपना नामांकन कर सकता है. जैसे की लालू जी ने दो जगह से अपना नामांकन दाखिल किया था. इनमे से एक जगह से वो हार गये. लेकिन अगर वो दोनो जगह से जीत जाते तो किसी एक सीट को उन्हे छोड़ना पड़ता और उस सीट के लिए फिर से चुनाव कराए जाते. इसका मतलब अतिरिक्त खर्च, और इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है? दूसरी बात भी इसी से संबंधित है. वो ये की जो लोग वर्तमान मे विधान सभा के सदस्य हैं वो भी लोकसभा मे चुनाव लड़ सकते हैं. और अगर वो जीत गये तो विधान सभा की वो सीट खाली हो जाएगी और वहाँ भी नये सिरे से चुनाव करवाए जाएँगे. अकेले बिहार मे ऐसे लगभग 14 उम्मीदवार हैं. पूरे देश मे पता नही कितने लोग ऐसे होंगे. मेरे सुझाव मे क़ानून बनाकर ये दोनो तरीके ख़त्म करवा देना चाहिए. आप क्या सोचते हैं?

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