Wednesday, May 27, 2009

प्रतिक्रिया

बहुत व्यथा होती है... और ये इसलिए की ऐसा बार बार होता है. सबसे ताज़ा घटना पंजाब की है. ऑस्ट्रिया में कोई घटना होती है तो उसकी लपट में पंजाब जलता है. पुलिसवालों का कहना है की कुल मिलाकर हिंसा की 86 वारदातें हुई है पंजाब मे. प्रदर्शन करने वालों ने जालंधर में जम्मू-कन्याकुमारी एक्सप्रेस के 4 डब्बों को जला डाला. उसमे सफ़र करने वाले लोग किसी तरह अपनी जान बचा पाए. मेरा प्रश्न ये है कि जो घटना विएना में हुई है उसके लिए भारत में प्रदर्शन करने का क्या तुक है? क्या यहाँ के लोग उस घटना के दोषी हैं? अगर नहीं तो यहाँ के लोग उसकी तपिश क्यूँ झेलें? गृहमंत्री जी का बयान आया है कि " पंजाब में जो कुछ हो रहा है, वो विएना की घटना की प्रतिक्रिया है और हमारा वहाँ की घटना पे कोई नियंत्रण नही है." ये बात या तो लोग समझना नहीं चाहते हैं या समझ कर भी अंजान बने हुए हैं. लेकिन ये कब तक चलेगा? कब तक लोग अपनी ज़िंदगी को किसी सरफिरे की खैरात समझ कर जीते रहेंगें. मेरी समझ में तो ये नही आता है कि आख़िर ट्रेन और बसों को जलाकर उन्हें कौन सा समाधान मिल जाता है? मैं तो ये मानता हूँ कि ये सारे घृणित काम ऐसे लोग सिर्फ़ अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए करते हैं. उन्हें बस एक मौका चाहिए ये बताने के लिए कि हाँ भाई हम भी अपना अस्तित्व रखते हैं. अब इसके लिए उन्हें चाहे जो करना पड़े. वरना मेरी समझ मे तो ये नही आता कि ऐसी प्रतिक्रिया का क्या तात्पर्य हो सकता है?

1 comment:

  1. Main tha apne khet me, tujhko bhi tha kaam
    Teri meri bhul ka raja pad gaya naam

    ReplyDelete